Affiliated to Allahabad State University, Allahabad

Short History Of College

image

राष्ट्र के सर्वागीण विकास के लिए नारी शिक्षा की नितान्त आवश्यकता है | नारी में शिक्षा के संचार से ही नहीं अन्त:करण की छिपी हुई पवित्र तथा अभ्युदय कारिणी शक्तियों के विकास से ही एक सर्वागीण विकसित राष्ट्र का अभ्युदय कराया जा सकता है | नारी शिक्षा के विकास द्वारा ही
शुद्ध भावोत्पत्ति, कर्तव्यपरायणता एवं नैतिकता का संचार तथा सदाचरण सम्भव है | "प्रज्ञानार्थम महाभागा पूजदि गृह दीप्तय: स्त्रिश्व लोकश्नम विशेषोप्ति कंचन:" अर्थात् सन्तान को जन्म देने के कारण स्त्रियाँ महान भाग्यशाली हैं | वे घर की ज्योति है तथा उनका सम्मान करना चाहिये |
माँ के रूप में सभी के सुन्दर जीवन का निर्माण "नारी शिक्षा" से परिपूर्ण के ही हाथों में सुरक्षित है | जिस प्रकार कोमल पौधों को माली जैसे चाहता है झुका देता है | कुम्हार अपनी मिट्टी के बर्तन अपनी इच्छानुसार आकृति दे डालता है | ठीक उसी प्रकार एक शिक्षित नारी अपनी संतान को अपने सरल एवं कोमल स्वभाव से अच्छा संस्कार दाल सकती है | अनुकरण की प्रवृति से ही सन्तानों की शिक्षा प्रारम्भ होती है |
जो सब संतानों में जन्म जात होती है | वह बाल्यकाल माँ की गोद में बिताता है | वह खाता है तो माँ की गोद में, सोता है तो माँ की गोद में खेलता है तो में की गोद मैं | अतः उसके जीवन का निर्माण नारी के ही हाथों मैं है | ऐसी अवस्था मैं  नारी का शिक्षित होना अति आवश्यक है यदि मैं शिक्षा से परिपूर्ण है तो अपने संतान को कर्तव्य परायण, "ईमानदार" धीर- वीर एवं गम्भीर बना सकती है | यदि मैं अशिक्षित है तो संतान को पाखण्डी, क्रोधी एवं दुराचारी बनने से रोक नहीं सकती |
नारी सदाचार की आदि शक्ति रही है | उसकी जिज्ञासा सदा जीवन स्तरीय रखना हम सब का गुरुत्तर दायित्व है | सांस्कृतिक आधार नारी शिक्षा के लिए आवश्यक है | समाज की सुव्यवस्था, सम्बन्धों की दृढ़ता, परिष्कृत विचार, संस्कारों का परिमार्जन, आत्मशक्ति की ज्योर्तिमयता राष्ट्रीय चरित्र की प्रतिष्ठा एवं समपर्ण का तादात्म्य जैसे गुण शिक्षित नहीं को जीवन्त बना देतें है |
राष्ट्र के विकास के लिए नारी के प्रति हम सम का युद्धरत होना है | शिक्षा के असंतुलन को समाप्त करना है |
जातिधर्म एवं समाज के बन्धनों मैं जकड़ी हुई ग्रामीण कन्यायें विशेषकर हरिजन, गिरिजन एवं सर्वहारा वर्ग के निर्धन क्न्यऊँ मैं नव चेतना का सन्च्हर करने के लिए कन्याओं मैं नव चेतना का संचार करने के लिए कन्याओं को शिक्षित होना नितान्त आवश्यक है |
अत्यन्त विषम परिस्थितियों मैं साधनों एवं सुविधाओं के अभाव मैं सतत जागरूक एवं संधर्षरत रहते हुए कर्तव्य एवं कर्म मैं निष्टापूर्वक लगे रहकर राष्ट्रपिता पूज्य बापू के स्पप्न "नारी शिक्षा से ही परिवार, समाज एवं राष्ट्र का विकास सम्भव है |" को साकार स्वरूप प्रदान करने का प्रयास करने वाले माननीय शिर अभयराज सिंह यादव "मंत्रीजी" ग्रामीण जनजीवन में बालिकाओं की शिक्षा की उपलब्धियों को प्राप्त करने में कठोर परिश्रम, लगाम त्याग एवं तपस्या कर रहे है | यह कालजयी बनकर विद्यालय एवं महाविद्यालय की एक- एक ईट पर अनादि काल तक अंकित रहेगा |
ग्राम कन्याओं को प्रारम्भिक शिक्षा से इण्टरमीडिएट स्तर तक की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वर्ष 1970 में श्रीमती शकुन्तला देवी यादव कन्या इण्टरमीडिएट कालेज, रामनगर की स्थापना कर ग्राम कन्याओं की शिक्षा की जो ज्योति जलाई है उसका प्रकाश आज सम्पूर्ण ग्रामीण क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है |
जनपद इलाहबाद से 45 किलोमीटर पूरब "दिल्ली - हावड़ा" मुख्य रेलमार्ग पर स्थित रेलवे स्टेशन मेजारोड से 5 किलोमीटर उतर माँ शीतला देवी के पावन धाम रामनगर में ग्राम कन्याओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए "आभा यादव स्मारक कन्या डिग्री कालेज, रामनगर, मेजा - इलाहबाद" प्रात: स्मरणीय पूज्य सरदार राज नारायण सिंह यादव की प्रेरणा एवं उच्च न्यायलय इलाहबाद के पूर्व न्यायाधीश माननीय शिर सखाराम जी यादव के मार्ग दर्शन में उ०प्र० के पूर्व मुख्यमंत्री श्र्द्धेश्य माननीय श्री राम नरेश जी यादव के कर कमलों द्वारा शिलान्यास सम्पन्न कराकर प्रशासनिक एवं शिक्षण कक्षों का निर्माण एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से मान्यता प्राप्त कर जुलाई 2001 कला संकाय के अंतर्गत स्नातक स्तर की कक्षाएं संचलित कर अद्वितीय कार्य किया है |
अतः समस्त सम्मानित जनों, क्षेत्रीय जनों एवं अभिभावकों से विन्रम निवेदन है कि ग्राम कन्याओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु आभा यादव स्मारक कन्या पी जी कालेज, रामनगर , मेजा - इलाहबाद  में प्रवेश दिलवाकर नारी शिक्षा के विकास में योगदान करें |
धन्यवाद !