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Manager Message

विद्यालय के विकास हेतु सत्त्त प्रयत्नशील एवं अदम्य साहस के प्रेरणास्रोत

हे युग मानव कुल के गौरव, कर्तव्य निष्ठकर्मठ योगी |
मानवता के अनुपम प्रतीक, सह्दयता के चिर सहयोगी ||

शोषित नारी, शिक्षा, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण

प्राचीन भारतीय इतिहास से लेकर आज के युग तक नारी जाति भारतीय समाज में उपेक्षा का शिकार रही है | पुरुष प्रधान समाज ने नारी को सदैव अपना गुलाम बनाये रखा और स्वयं को स्थापित किये रहने के लिए जब जैसा चाह वैसा उपयोग किया | हिन्दू स्मृतिकारों ने "यंत्र नय्स्तुपूंजयन्ते, रमन्ते तत्र देवता" जैसे लुभ्वने नारे देकर नारी के साथ ठीक वैसा ही बर्ताव किया, जैसा कि पशु को बलि देने से पूर्व उसे खूब सजा - सवांर कर व पूजा करके बलि वाला पुजारी करता है | नारी को मूक पशु की भाँति रखकर समाज का पुरुष वर्ग अपना उल्लू सीधा करता रहा है | नारी को यह तो बताया गया है कि नारी "जननी" है किन्तु माँ के रूप में उसे आजीवन अपने पुत्र का नौकर बना दिया गया | नारी को पुरुष के मोक्ष के लिए देवी बनाने का झाँसा देकर उसे सदैव के लिए भोग्या बना दिया गया | गृह स्वामिनी का पद देकर नारी को एक कोठरी में कैद कर दिया गया और पर्दा देकर पुरुष समाज ने उसकी वैयत्तिक स्वतंत्रता का अन्त कर दिया | पूर्णता के लिए पुरुष को नारी की आवश्यकता पड़ी और नारी को पुरुष की पूर्णता के लिए हवन सामग्री बना दिया गया जिसे कि आग में झुलस कर जिन्दगी इस जिये जीना था क्योंकि पुरुषत्व को नारी को सीढी बनाकर मोक्ष की प्राप्ति करनी थी किन्तु पुरुषों की इस पूर्णता में नारी का अस्तित्व कहाँ खो गया | आज हम ढूँढ पाने में असफल रहे हैं | इक्कीसवीं सदी के आज के वैज्ञानिक युग में पुरुष वर्ग अपने समान ही प्राकृतिक महत्व वाले नारी समाज का शोषण कर रहा है | आज के पुरुष वर्ग की मानसिकता, नारी को भोग्या मात्र ही समझने की है | आज की नारी को सामाजिक, राजनैतिक आर्थिक व धार्मिक रूप से बराबरी का दर्जा नहीं प्राप्त हो रहा है | पुरुष वर्ग नारी के साथ शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना, असमानता व शोषण, का सम्बन्ध ही बनाये हुये है | आज नारी के लिए स्थापित तमाम संवैधनिक उपबंधो के बावजूद नारी जाति अनिवार्य रूप से शोषित, दलित और अधिकार विहीन है | सामाजिक संरचना की जटिलता ने नारियों के आस्तित्व के चारों ओर काँटेदार जल बना रखा है और नारी जाति के स्वतंत्र अस्तित्व को इस तरह दास बना रखा है कि जब तक हर पुरुष और हर नारी एक दूसरे के प्रति सचेत नहीं होगी तब तक यह अमानवीय परम्परागत दासता बरकरार रहेगी | अतः नारी को अपने अधिकारों एवं सुरक्षा के लिए बनाये गये वैधानिक नियमों तथा नारी जाति के लिए किये जा रहे प्रयासों की पूरी जानकारी होने के लिए शिक्षित होना अति आवश्यक है तभी शासन द्वारा संचालित नारी सशक्तिकरण अभियान सफल हो सकेगा | शिक्षित नारी ही स्वतंत्रता के प्राकृतिक अधिकार का उपयोग करके नारी वर्ग सम्पूर्ण प्राणी जगत का विकास कर सकेगी |

अरविन्द कुमार यादव

(प्रबन्धक)